शिक्षक दिवस 2025: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शिक्षकों को दिया राष्ट्रीय सम्मान

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भारत में हर वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस बड़े उत्साह और आदर के साथ मनाया जाता है। यह दिन शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले शिक्षकों का सम्मान करने का विशेष अवसर होता है। शिक्षक न केवल ज्ञान प्रदान करते हैं बल्कि समाज को नैतिक, बौद्धिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षक सम्मान 2025 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देशभर से चयनित 45 उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया, जो शिक्षा में नवाचार, सामाजिक समावेशन, पर्यावरण संरक्षण और बच्चों की समग्र विकास में योगदान कर रहे हैं।

शिक्षा का महत्व और शिक्षक की भूमिका

भारत जैसे विशाल देश में शिक्षा का प्रसार और गुणवत्ता दोनों ही चुनौतीपूर्ण विषय हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी आधारभूत सुविधाओं की कमी है, वहीं कई शिक्षकों ने अपने समर्पण और नवाचार से बच्चों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। ऐसे शिक्षकों की मेहनत को पहचान देना समाज के लिए आवश्यक है। शिक्षक सम्मान 2025 उसी दिशा में एक सार्थक कदम है, जो न केवल प्रेरणा देता है बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को मंच प्रदान करता है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का संबोधन

सम्मान समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षकों की भूमिका केवल किताबों तक सीमित नहीं है। वे बच्चों के चरित्र निर्माण में, उनकी सोच को दिशा देने में और राष्ट्र निर्माण में सबसे आगे रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक समाज में विश्वास का प्रतीक हैं और कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता समाज को प्रेरित करती है। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को न केवल परीक्षा की तैयारी कराएँ, बल्कि उन्हें जीवन की चुनौतियों से निपटने की मानसिक शक्ति भी प्रदान करें।

45 शिक्षकों का चयन – किस आधार पर?

इस बार शिक्षक सम्मान 2025 के लिए विभिन्न श्रेणियों में शिक्षकों का चयन किया गया। इनमें शामिल थे:
✔ दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा का विस्तार करने वाले शिक्षक
✔ विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने वाले शिक्षक
✔ डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने वाले शिक्षक
✔ पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता फैलाने वाले शिक्षक
✔ खेल, कला और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों का सर्वांगीण विकास करने वाले शिक्षक

देश के अलग-अलग राज्यों से आए ये शिक्षक अपने अनुभव साझा कर रहे थे और कई ने बताया कि सीमित संसाधनों में भी उन्होंने शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए अनोखे प्रयोग किए हैं।

शिक्षकों के संघर्ष की कहानियाँ

सम्मानित शिक्षकों में कई ऐसे भी हैं जिन्होंने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए शिक्षा को बच्चों तक पहुँचाया। कहीं पहाड़ी क्षेत्रों में पहुँचने के लिए किलोमीटरों पैदल चलना पड़ा, कहीं बिजली और इंटरनेट की सुविधा न होने के बावजूद बच्चों को पढ़ाया गया। कुछ शिक्षकों ने स्थानीय भाषा में शिक्षा सामग्री तैयार कर बच्चों को आसानी से समझाया। इन सभी शिक्षकों ने यह साबित किया कि शिक्षा सिर्फ संसाधनों का खेल नहीं है, बल्कि जुनून और सेवा का परिणाम है।

शिक्षा में नवाचार और प्रेरणा

इस बार के शिक्षक सम्मान में नवाचार पर विशेष ध्यान दिया गया। कई शिक्षकों ने ‘स्थानीय ज्ञान आधारित शिक्षा’, ‘समुदाय आधारित अध्ययन केंद्र’, और ‘डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म’ के ज़रिए बच्चों तक शिक्षा पहुँचाई। कुछ शिक्षकों ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रोजेक्ट शुरू कर बच्चों में जिम्मेदारी और जागरूकता पैदा की। यह सम्मान केवल पुरस्कार नहीं, बल्कि शिक्षा में नई सोच को प्रोत्साहित करने का प्रयास है।

समाज पर प्रभाव

जब बच्चों को प्रेरित करने वाले शिक्षक सम्मानित होते हैं, तो समाज में शिक्षा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है। ऐसे कार्यक्रमों से शिक्षक स्वयं प्रेरित होते हैं, और अन्य शिक्षकों को भी उत्कृष्ट कार्य करने की दिशा में प्रोत्साहन मिलता है। साथ ही, अभिभावकों और विद्यार्थियों में यह विश्वास पैदा होता है कि शिक्षा एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें शिक्षक मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं।

आगे की दिशा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने भाषण में यह स्पष्ट किया कि सरकार और समाज को मिलकर शिक्षकों के लिए बेहतर सुविधाएँ प्रदान करनी चाहिए। शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम, डिजिटल शिक्षा की पहुँच, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाएँ और बच्चों के लिए सुरक्षित शिक्षण वातावरण बनाने की दिशा में काम करना आवश्यक है। साथ ही, शिक्षा को केवल परीक्षा तक सीमित न रखकर जीवन कौशल से जोड़ना समय की मांग है।


निष्कर्ष

शिक्षक सम्मान 2025 केवल एक पुरस्कार कार्यक्रम नहीं है, यह उन शिक्षकों की मेहनत, संघर्ष और समर्पण का उत्सव है जिन्होंने अपनी सीमित साधनों के बावजूद समाज में ज्ञान की रोशनी फैलायी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा दिया गया यह सम्मान सभी शिक्षकों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गया है। शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, समर्पण और सेवा भाव के साथ आगे बढ़ने की यह पहल आने वाले समय में देश की प्रगति का आधार बनेगी।

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