🪔 सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में दीपावली के मौके पर ग्रीन पटाखों के उपयोग
दीपावली का त्योहार भारत की सबसे रोशनी भरी और खुशियों से भरी रातों में से एक मानी जाती है। लेकिन हर साल दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के कारण इस पर्व पर पटाखों की बिक्री और उपयोग पर रोक लगा दी जाती थी। इस बार देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों के उपयोग और बिक्री पर मंजूरी दी, जिससे लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
कोर्ट ने यह फैसला धार्मिक भावनाओं और पर्यावरण दोनों के संतुलन को ध्यान में रखते हुए दिया है। यह निर्णय उन लोगों के लिए राहत लेकर आया है जो दीपावली पर पारंपरिक तरीके से उत्सव मनाना चाहते हैं।
🌿 क्या हैं ग्रीन पटाखे?
ग्रीन पटाखे वे पटाखे होते हैं जिनमें पारंपरिक पटाखों की तुलना में कम हानिकारक रासायनिक तत्व मौजूद होते हैं। इनमें सल्फर, पोटेशियम नाइट्रेट और एल्युमिनियम की मात्रा कम की जाती है ताकि इनसे निकलने वाला धुआं और शोर सीमित रहे।
इन पटाखों को CSIR-NEERI (नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टिट्यूट) द्वारा प्रमाणित किया जाता है।
इसलिए जब सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों के उपयोग और बिक्री पर मंजूरी दी, तो इसका अर्थ यह हुआ कि अब दीपावली में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना खुशी मनाना संभव होगा।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्यों अहम है
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में हर साल दीपावली के बाद हवा की गुणवत्ता गंभीर स्तर तक गिर जाती है। प्रदूषण के कारण सांस लेने में तकलीफ, स्मॉग और स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ जाती हैं।
इसी कारण कुछ सालों से सभी तरह के पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध था। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों के उपयोग और बिक्री पर मंजूरी दी, जिससे एक नया संतुलन स्थापित हुआ है।
यह फैसला लोगों को यह संदेश देता है कि परंपरा और पर्यावरण दोनों साथ-साथ चल सकते हैं।
🧾 सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए नियम
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों के उपयोग और बिक्री की मंजूरी देते हुए कुछ कड़े नियम भी बनाए हैं —
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केवल ग्रीन पटाखों की ही बिक्री और उपयोग की अनुमति होगी।
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बिक्री केवल लाइसेंस प्राप्त दुकानदारों को ही करने की अनुमति होगी।
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किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या ई-कॉमर्स वेबसाइट पर पटाखे बेचने की इजाजत नहीं होगी।
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दीपावली के दिन रात 8 बजे से 10 बजे तक ही पटाखे फोड़ने की अनुमति दी गई है।
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पटाखों की आवाज़ तय सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए।
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नियम तोड़ने वालों पर स्थानीय प्रशासन कार्रवाई करेगा।
इन नियमों के साथ, सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों के उपयोग और बिक्री पर मंजूरी दी, ताकि दीपावली का उल्लास बना रहे और प्रदूषण पर नियंत्रण भी रहे।
🎇 लोगों की प्रतिक्रिया
इस फैसले के बाद लोगों में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं।
एक ओर आम जनता ने राहत की सांस ली है क्योंकि अब वे दीपावली पर पटाखे जला सकेंगे।
वहीं दूसरी ओर पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि इन नियमों का सख्ती से पालन किया जाए तो यह फैसला प्रदूषण नियंत्रण में मददगार साबित हो सकता है।
लोगों का मानना है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों के उपयोग और बिक्री पर मंजूरी दी, तो सभी को इस फैसले का सम्मान करते हुए जिम्मेदारी के साथ पटाखे फोड़ने चाहिए।
🌍 ग्रीन पटाखों का पर्यावरण पर असर
वैज्ञानिकों के अनुसार, ग्रीन पटाखों से सामान्य पटाखों की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत कम प्रदूषण होता है।
इनसे निकलने वाला धुआं और गैसें कम हानिकारक होती हैं। साथ ही, इनकी आवाज़ भी नियंत्रित होती है जिससे बुजुर्गों, बच्चों और पशुओं को परेशानी कम होती है।
यदि जनता सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करे, तो दीपावली के बाद प्रदूषण स्तर में काफी सुधार देखने को मिल सकता है।
🪔 दीपावली का नया पर्यावरण-मित्र स्वरूप
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों के उपयोग और बिक्री पर मंजूरी दी — यह सिर्फ एक फैसला नहीं, बल्कि एक पर्यावरणीय चेतना का संदेश भी है।
यह निर्णय हमें याद दिलाता है कि परंपराएं तब तक ही सुंदर हैं जब तक वे प्रकृति के साथ तालमेल बनाए रखें।
ग्रीन पटाखों के साथ दीपावली मनाने से हम अपने उत्सव को अधिक संतुलित, सुरक्षित और स्वच्छ बना सकते हैं।
🎆 निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों के उपयोग और बिक्री पर मंजूरी दी — यह फैसला न सिर्फ दीपावली मनाने वालों के लिए खुशी की खबर है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।
यदि लोग नियमों का पालन करते हुए ग्रीन पटाखों का उपयोग करें, तो यह निर्णय प्रदूषण नियंत्रण और जन-जागरूकता दोनों के लिए कारगर साबित होगा।
यह दीपावली केवल रोशनी की नहीं, बल्कि जिम्मेदारी की दीपावली भी होगी —
जहां खुशियां भी होंगी और प्रकृति की सुरक्षा भी। 🌿✨
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