करवाचौथ का चांद देर से क्यों निकलता है?
करवाचौथ भारत में विवाहित महिलाओं का एक प्रमुख व्रत है, जिसे पूरे श्रद्धा और प्रेम के साथ मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। लेकिन हर साल एक सवाल सबके मन में आता है — “करवाचौथ का चांद देर से क्यों निकलता है?” जब बाकी दिनों में चांद जल्दी दिखाई देता है, तो करवाचौथ के दिन ही देर क्यों लगती है? आइए जानते हैं इसका वैज्ञानिक कारण।
🌕 करवाचौथ और चंद्रमा का संबंध
करवाचौथ का पूरा व्रत चंद्रमा पर आधारित है। महिलाएं सूर्योदय से लेकर चांद निकलने तक निर्जला व्रत रखती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही भोजन करती हैं। यही वजह है कि इस दिन चांद का देर से निकलना सभी के लिए उत्सुकता और चिंता का विषय बन जाता है।
🌌 वैज्ञानिक कारण — पृथ्वी की गति और चंद्रमा की स्थिति
अब समझते हैं कि करवाचौथ के दिन चांद देर से क्यों निकलता है।
चंद्रमा हर दिन लगभग 50 मिनट देरी से उगता है। इसका कारण यह है कि चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करते समय थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ता जाता है। पृथ्वी को अपनी धुरी पर घूमने में 24 घंटे लगते हैं, जबकि चंद्रमा को पृथ्वी की परिक्रमा करने में लगभग 27.3 दिन लगते हैं।
हर दिन चंद्रमा अपनी स्थिति बदलता है और लगभग 12–13 डिग्री आगे बढ़ जाता है। इसी वजह से अगले दिन चांद को देखने में करीब 50 मिनट की देरी होती है। करवाचौथ का व्रत पूर्णिमा के कुछ दिन बाद, यानी कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है। इस समय चंद्रमा अपनी कक्षा में ऐसी स्थिति में होता है कि उसका उदय प्राकृतिक रूप से देर से होता है।
📅 भौगोलिक स्थिति का भी प्रभाव
आपके शहर या स्थान के अनुसार भी चांद निकलने का समय बदलता है।
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उत्तर भारत में चांद थोड़ा जल्दी दिखाई देता है।
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जबकि दक्षिण और पूर्वी भारत में वही चांद 10–15 मिनट बाद नजर आता है।
इसका कारण पृथ्वी का झुकाव और स्थान का अक्षांश (latitude) है। इसीलिए अलग-अलग शहरों में करवाचौथ के चांद का समय अलग-अलग होता है।
🔭 करवाचौथ के चांद का वैज्ञानिक अवलोकन
खगोल विज्ञान के अनुसार, करवाचौथ का चांद “वॉक्सिंग गिबस” (Waxing Gibbous) अवस्था में होता है, यानी वह पूर्णिमा के करीब होता है लेकिन पूरी तरह पूर्ण नहीं होता। इस अवस्था में चांद का उदय देर से होता है क्योंकि पृथ्वी के घूर्णन और चंद्रमा की परिक्रमा की दिशा एक-दूसरे से थोड़ी भिन्न होती है।
यही कारण है कि करवाचौथ की रात चांद सबसे खूबसूरत और चमकदार दिखता है।
🙏 धार्मिक दृष्टिकोण से महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, करवाचौथ का चांद न सिर्फ चंद्र देव बल्कि सौभाग्य और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं चांद को देखकर अपने पति की लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं। देर से निकलने वाला यह चांद महिलाओं की परीक्षा भी लेता है, लेकिन जब वह निकलता है, तो सभी के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।
🌠 आज के समय में करवाचौथ का अनुभव
तकनीक के इस युग में अब महिलाएं मोबाइल एप्स या पंचांग वेबसाइट्स से चांद निकलने का सटीक समय जान सकती हैं। लेकिन फिर भी करवाचौथ का असली आनंद तब आता है जब परिवार, बालकनी या छत पर सब मिलकर आसमान की ओर देखते हैं और कहते हैं — “आ गया चांद!”
🌙 निष्कर्ष
तो अब आप जान गए होंगे कि करवाचौथ का चांद देर से क्यों निकलता है। इसका कारण केवल धार्मिक नहीं बल्कि पूरी तरह वैज्ञानिक और खगोलीय है। पृथ्वी की घूर्णन गति, चंद्रमा की परिक्रमा और भौगोलिक स्थिति — इन तीनों के कारण चांद हर दिन कुछ देर से उगता है।
इसलिए अगली बार जब आप करवाचौथ पर आसमान में चांद का इंतजार करें, तो यह जानकर मुस्कुरा लें कि इस देर के पीछे भी प्रकृति का सुंदर विज्ञान छिपा हुआ है।
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